शब्द दूत

व्यवस्था सड़ी हो तो भ्रष्टाचार पनपता है , अवस्था उघडी हो तो अनाचार पनपता है --- विनोद भगत

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=======कौन हूँ मैं=======

Posted On: 22 Mar, 2014 Others में

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मौन हूँ मैं ,
निशब्द नहीं हूँ मैं ,
कौन हूँ मैं ,
प्रश्न यक्ष से खड़े हैं ,
उत्तर की तलाश में ,
एक नया प्रश्न जन्मता है ,
अर्थ बदलते शब्द ,
मौन हूँ मैं ,
निशब्द नहीं हूँ मैं ,
कौन हूँ मैं ,
हर नई सुबह एक नयी आशा ,
संध्या होने तक ,
पुनः सालती निराशा ,
थकी हुयी आकांक्षा ,
मौन हूँ मैं
निशब्द नहीं हूँ मैं ,
कौन हूँ मैं ,
कंक्रीट और पत्थर के जंगल में ,
पथराती हुयी संवेदना ,
हर पत्थर है नुकीला ,
काटता सम्बन्धों की डोर ,
मौन हूँ मैं
निशब्द नहीं हूँ मैं ,
कौन हूँ मैं ,
———विनोद भगत

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ANAND PRAVIN के द्वारा
March 24, 2014

http://anandpravin.jagranjunction.com/2014/03/24/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%89%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9A-2/ आपभी शामिल हों इस महामेला में………..सादर आपत्ति होने पर कृपया कमेन्ट डिलीट कर दें……


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